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6th House  रोग, ऋण, शत्रु का है. इस कुंडली में 6th house का स्वामी बुध देव है. जो अपने से 6th भाव में है. आणि की 6th House को प्रबल करता है या फिर यु कहिए के वों होना का प्रबल योग बनाता है. वृश्चिक राशि गुप्त रहस्य की है साथ में हमारी बॉडी में प्राइवेट पार्ट्स का भाग इस राशि में आता है. और इस कुंडली में बुध देव रोग के स्वामी वृश्चिक राशि में खुद मंगल देव के साथ बैठे है. मंगल देव पराक्रम के देव है. काट कुट यानी कि ऑपरेशन इनसे ही संभंदित होता है. तो कुल मिलाकर हम ये के सकते है कि इस व्यक्ति को अपने प्राइवेट पार्ट्स के रिलेटेड ऑपरेशन आ सकता है.  जो पिछले सालों में हुआ. जब शनिदेव की महादशा चल रही थी, यानी कि 1st house और 2nd house एक्टिवेटेड था, यानी कि स्वयं, और घर और पैसे का संबंध था. शनिदेव 1st house में है यानि कि स्वयं को दर्शाते है. उसके बाद बुध देव की अंतर दशा यानी कि रोग का और भाग्य सा स्थान एक्टिवेशन में आया. बुध देव 11st house में है यानि कि वृश्चिक राशि में है. जो उपर बताया गया वैसे प्राइवेट पार्ट्स में रोग देंगे. उसके बाद शुक्रदेव की दशा अत...

राशि (Zodiac sign)

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राशि (Zodiac sign) मेष राशि यह राशि पूर्व जाति पूर्व दिशा की स्वामिनी लाल रंग वाली, क्रांति हीन, क्षत्रिय वर्ण, चर सज्ञक, अग्नि तत्व, सामान्य अंग, अल्प संतति तथा पित्त प्रकृति जाती है. यह अहंकारी साहसी तथा मित्रों के लिए दयालु स्वभाव रखने वाली है इसके द्वारा जातक के मस्तक के संबंध में विचार किया जाता है. वृष राशि यह राशि स्त्री जाति दक्षिण दिशा के स्वामी, श्वेत रंगवाली, क्रांति हील वैश्य वर्ण, स्थिर सज्ञक, शिथिल शरीर, शुभकराक, महा कष्टकारी तथा भूमि तत्व वाली. यह स्वार्थी तथा सांसारिक कार्यों में दक्षता एवं बुद्धिमता से काम लेने वाली. इसके द्वारा जातक के मुंह संबंध में विचार किया जाता है. मिथुन राशि यह राशि पुरुष जाति पश्चिम दिशा की स्वामिनी, हरितरंग, चिकनी, ऊसन स्वभाव, शुद्र वर्ण, शिथिल शरीर, विषमउदयी तथा महाशब्दकारी है. यह शिल्पी तथा विध्या व्यसनी स्वभाव की है. इसके द्वारा जातक के स्कंध तथा बाहों के संबंध में विचार किया जाता है. कर्क राशि यह राशि स्त्री जाति, उत्तर दिशा की स्वामिनी, रक्त धवल मिश्रित रंग वाली, जलचरी, सौम्य, कफ प्रकृति, बहु...

तिथि पूजा इष्ट देव

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 तिथि  इष्ट देव प्रतिपदा यानी पहली तिथि पर अग्नि देव की पूजा करें। द्वितिया तिथि पर ब्रह्माजी की पूजा करनी चाहिए। तृतीया तिथि पर धन के स्वामी कुबेर देव  तथा गौरी की पूजा करनी चाहिए। चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेशजी की पूजा करें। पंचमी पर नाग देवता की पूजा करनी चाहिए। षष्ठी तिथि पर भगवान कार्तिकेय की पूजा करें। सप्तमी पर भगवान सूर्यदेव की विशेष पूजा करनी चाहिए। अष्टमी पर शिवजी की पूजा करें। नवमी तिथि पर मां दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। दशमी पर भगवान यमराज की पूजा करें। एकादशी पर विश्वेदेवों की पूजा करनी चाहिए। द्वादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। त्रयोदशी पर कामदेव की पूजा करनी चाहिए। चतुर्दशी तिथि पर शिवजी की पूजा करें। पूर्णिमा तिथि पर चंद्र देवी की पूजा करनी चाहिए। अमावस्या तिथि पर पितर देवता के निमित्त पूजा करें।

नक्षत्र स्वामी

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नक्षत्र स्वामी उपाय करे हेतु अश्विनी नक्षत्र का स्वामी अश्विनी कुमार है। भरणी नक्षत्र का स्वामी यम है। कृतिका नक्षत्र का स्वामी अग्नि है। और रोहिणी नक्षत्र का स्वामी ब्रह्माजी है। मृगशिरा का स्वामी चंद्रमा है। आद्रा नक्षत्र का स्वामी शिव है। पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी अदिति है। पुष्य नक्षत्र का स्वामी बृहस्पति है। अश्लेषा नक्षत्र का स्वामी सर्व है। मघा नक्षत्र का स्वामी पित्र देव है। पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी भगदेव है। उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी आयार्मा हैं। हस्त नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। चित्रा नक्षत्र का स्वामी त्वष्टा (विश्वकर्मा)है। स्वाति नक्षत्र का स्वामी वायु है। विशाखा नक्षत्र का स्वामी इंद्र और अग्नि है। अनुराधा नक्षत्र का स्वामी मित्र है। ज्येष्ठा नक्षत्र का स्वामी इंद्र है। मूल नक्षत्र का स्वामी राक्षस है। पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी जल है। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी विश्वा देवा है। ...

सूर्य (Hindi)

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सूर्य मित्र : चंद्रमा, मंगल, वृहस्पति। शत्रु : शुक्र, शनि। सम : बुध अधिपति : सिंह । मूलत्रिकोण : सिंह 0°-20° उच्च : मेष 10° नीच : तुला 10° लिंग : पुरुष। दिशा : पूर्व। शुभ रंग : संतरी, केसरिया, हल्का लाल। शुभ रत्न : माणिक, रक्तमणि। शुभ संख्या : 1,10,19,28 देवता : शिव, रूद्र, नारायण, अग्नि, सच्चिदानन्द। मंत्र : ऊँ ह्राम् ह्रीम् ह्रौम् से सूर्याय नम:। वैदिक मंत्र : ऊँ आस्त्येन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मृत्र्य च। हिरण्येन सविता रथेनादेवी यति भुवना विपश्यत्।। दान योग्य वस्तुएं : गेहुं, तांबा, माणिक, गुड़, लाल कपड़ा, लाल फूल, चंदंन की लकड़ी, खंडसारी, केसर (रविवार को सूर्योदय के समय)। स्वरूप : शहद के रंग वाली आँखे, कमजोर दृष्टि, छोटे बाल, वर्गाकार, अत्यधिक चिड़चिड़ापन, सुगठित शरीर। त्रिदोष व शरीर के अंग : पित्त, वायु, हड्डियां, नाभि/मध्य भाग। रोग : कमजोर दृष्टि, हृदय रोग, विषाक्तता, हड्डी टूटना, मानसिक परेशानी, सिर दर्द, माइग्रेन, बुखार, जलना, कटना, चोट, सूजाक, त्वचा रोग, कोढ़, पीलिया, पित्तिय प्रकृति, पेट से संबंधित परेशानी, गड़...

Sun (Surya) (English)

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Sun Guna:  Satwik, Kshatriya Friends: Moon, Mars, Jupiter. Enemies: Saturn, Venus. Neutral: Mercury Lord of: Leo Mool trikona Sing: Leo 0° -20° Exaltation  Sing : Aries 10° . Debilitation  Sing : Libra 10°  Sex: Male. Direction: Middle of East Zone. Lucky Colors: Orange, light red. Lucky stone: Ruby (Manek) Lucky Nos.: 1,10,19,28 etc. Deity: Siva, Rudra, Lord Narayana, Tantrokt mantra : Om hraam hreem hraum sah suryaye namah. Vedic mantra : ऊँ आस्त्येन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मृत्र्य च। हिरण्येन सविता रथेनादेवी यति भुवना विपश्यत्।। Articles of donation : Wheat , Copper, Ruby (Manek), Gud, Orange cloth, Orange Color flowers, Sandal Wood, Saffron (Sunday Morning 6 AM to 7.30 AM). Represents : Soul, Ego, Doctoring, Vitality, Dhatus, Capacity, Strength. Qualities :  Political, aristocratic, royal, planet, quadruped, a source of life, a natural atamkaraka, Barren, heat...